उत्तराखंड

विरोध:जिस दिन खुलने हैं बाबा केदार के कपाट,उसी दिन बंद का ऐलान

गढ़वाल:केदारनाथ धाम में भवनों की अनियमित तरीके सेे तोड़-फोड़ की कार्यवाही से केदारसभा, तीर्थ पुरोहित समाज एवं व्यापारियों में आक्रोश बना हुआ है। इस बाबत उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आगामी दस मई से शुरू होने वाली यात्रा का सम्पूर्ण बहिष्कार की चेतावनी दी है।

बहिष्कार के तहत यात्रा मार्ग पर सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान, भवन, विश्राम गृह सभी बंद रखे जायेंगे। वहीं तीर्थ पुरोहितों ने केदारनाथ में गौशाला तोड़े जाने पर गहरा दुख जताया है। प्रशासन की इस कार्यवाही के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की चेतावनी भी दी गई है।


दरअसल, केदारनाथ धाम में तीसरे चरण के पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। निर्माण के तहत पुराने भवनों को तोड़कर नये भवनों का निर्माण होना है, लेकिन यह कार्य तीर्थ पुरोहित समाज एवं हक-हकूकधारियों के राय-मश्वरे के हो रहे हैं,

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जिस कारण केदारसभा, तीर्थ पुरोहित समाज एवं व्यापारियों में आक्रोश बना हुआ है। ऐसे में केदारसभा ने बैठक कर शासन-प्रशासन की इस कार्यवाही का विरोध किया। बैठक में केदारसभा के पदाधिकारियों ने कहा कि इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। बैठक के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे ज्ञापन में केदारसभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने कहा कि केदारनाथ धाम में शासन-प्रशासन द्वारा अनियोजित तरीके से भवनों के साथ तोड़-फोड़ की जा रही है। इस तोड़फोड़ का लगातार विरोध किया जा रहा है, बावजूद इसके स्थानीय लोगों की अनुमति के बिना कार्यवाही की जा रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम में ड्îूटी पर तैनात अधिकारियों द्वारा भवनों के आगे गड्डे बनाए जा रहे हैं, जिससे उनके भवनों को क्षति पहुंच रही है। कहा कि शासन-प्रशासन की इस तरह की कार्यवाही के चलते स्थानीय व्यापारी, होटल स्वामी 10 मई को केदारनाथ धाम में अपने प्रतिष्ठान, भवन एवं विश्रामगृह बंद रखेंगे।

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वहीं दूसरी ओर केदारनाथ में भू-स्वामियों के भवनों के आगे गड्डे बनाने को लेकर नाराज तीर्थपुरोहितों ने अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी है। पुलिस अधीक्षक को अवगत कराते हुए तीर्थपुरोहितों ने कार्यवाही की मांग की है। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि उनका यात्रा पर ही सबकुछ निर्भर है। केदारनाथ में भूमिधरी का अधिकार मिलने के बावजूद शासन-प्रशासन अपनी मनमर्जी कर रहा है। वह जमीन कब्जे की नहीं है, जिस तरह से अधिकारी बिना नोटिस के कार्यवाही कर रहे हैं, उसको लेकर न्यायालय की शरण ली जाएगी। केदारनाथ के लिए 2013 में शासनादेश भी जारी हो गया था, फिर भी उन्हें अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। कहा कि तीर्थ पुरोहितों ने इस मामले में पुलिस को तहरीर दे दी है। केदारनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने कहा कि केदारनाथ धाम में बनाई गई गौशाला को भी प्रशासन ने तोड़ दिया है। यह प्रशासन की कुंठित मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को भगवान भोले का दूध का अभिषेक कराने को लेकर बड़ी मुश्किल से धाम तक गाय पहुंचाई जाती है और इस गौशाला में गायों को रखा जाता है। प्रशासन ने गौशाला को तोड़कर अच्छा कार्य नहीं किया है।

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