उत्तराखंड

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर मंथन

हरिद्वार। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में इनोवेशन काउंसिल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में नवाचार, तकनीकी विकास और समाजहित में उसके उत्तरदायी उपयोग पर व्यापक चर्चा की गई। इस वर्ष की थीम “Responsible Innovation for Inclusive Growth” रही, जिसके अंतर्गत समावेशी विकास के लिए उत्तरदायी तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नवाचारों पर विशेष फोकस किया गया।

कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि किसी भी संस्थान की वास्तविक प्रगति उसके नवाचारों, शोध कार्यों और समाजोपयोगी तकनीकी योगदान से तय होती है। उन्होंनेj कहा कि विद्यार्थियों के नए विचार, अनुसंधान गतिविधियां और उद्यमशीलता प्रयास विश्वविद्यालय में नवाचार की मजबूत संस्कृति तैयार कर रहे हैं।

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मुख्य अतिथि पंजाब विश्वविद्यालय के रसायन प्रौद्योगिकी विभाग की प्रोफेसर डॉ. ऋतु गुप्ता ने कहा कि प्रौद्योगिकी केवल मशीनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और प्रकृति की प्रत्येक वैज्ञानिक प्रक्रिया से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल आधुनिक उपकरण विकसित करना नहीं, बल्कि मानव जीवन को अधिक सुरक्षित, सरल और समृद्ध बनाना होना चाहिए।

संकायाध्यक्ष प्रो. मयंक अग्रवाल ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 11 मई 1998 को पोखरण परमाणु परीक्षण के माध्यम से भारत ने विश्व स्तर पर अपनी वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का परिचय दिया था। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम का उद्देश्य ऐसी स्वदेशी तकनीकों और एआई आधारित प्रणालियों को बढ़ावा देना है जो नैतिक मूल्यों, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित हों।

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उन्होंने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से संकाय में चल रहे विभिन्न नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और तकनीकी उद्यमिता के जरिए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए डॉ. ऋतु गुप्ता ने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने छात्रों को ऐसे नवाचार विकसित करने के लिए प्रेरित किया जो आमजन के लिए सरल, सुलभ और उपयोगी हों। इस दौरान विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न प्रोजेक्ट्स और नवाचारों की जानकारी लेकर उन्हें रचनात्मक सुझाव भी दिए गए।

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कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना को मजबूत करते हैं तथा उन्हें शोध और तकनीकी विकास के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम में प्रो. विवेक गुप्ता, प्रो. सुनील पंवार, डॉ. एम.एम. तिवारी, प्रो. विपुल शर्मा, डॉ. संजीव लाम्बा, डॉ. गजेन्द्र सिंह रावत और डॉ. पंकज कौशिक सहित संकाय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. लोकेश जोशी ने किया।

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