उत्तराखंड

गुरुकुल कांगड़ी संविवि में शिक्षकेत्तर कर्मचारी यूनियन ने लंबित मांगो को लेकर की बैठक

हरिद्वार। गुरूकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के शिक्षकेत्तर कर्मचारी यूनियन ने प्रबन्ध अध्ययन संकाय के सभागार में कर्मचारियों की एक आम सभा आयोजित की गई। कर्मचारियों की लंबे समय से चल रही मांगों को लेकर प्रशासन के साथ कई बार वार्ता का दौर भी हो चुका है। मगर वार्ताओं के मध्य मांगों का कोई भी समाधान नहीं हो सका है। वरिष्ठ कर्मचारियों के लंबे समय से प्रमोशन नहीं किये गये है।

इस बात को लेकर कर्मचारियों में भारी रोश बना हुआ है। कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष रंजनीश भारद्वाज ने कहा कि 23 अक्टूबर से 10 मांगें विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने 09 बार रखी जा चुकी है। और 03 बार कुलाधिपति के सामने भी रखी जा चुकी है। लेकिन प्रशासन द्वारा मांगों का कोई भी समाधान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आज सभागार में कर्मचारीयों ने भारी संख्या में मौजूद होकर असन्तोष की भावना को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कर्मचारीयों के रूटीन के कार्यों को भी टाल मटोल किया जा रहा है।

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शिक्षकेत्तर कर्मचारी यूनियन के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कहा कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर सभी कर्मचारी इस सभागार में कधों से कधां मिलाकर एकत्रित हुए है। इस बात का यह सबूत है कि कर्मचारियों के काम लंबे समय से लंम्बित पड़े हुए है। उन्होेंने कहा कि कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष और महामंत्री नरेन्द्र मलिक प्रशासन के साथ वार्ता कर चुके है, लेकिन कर्मचारियों को आजतक कोई भी प्रशासन से सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला है।

वरिष्ठ कर्मचारी शशि कान्त शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों की मांगे लंबे समय से चली आ रही है और सही भी है। मांगों के चलते कई बार प्रशासन और कर्मचारी यूनियन के मध्य आमना-सामना भी हो चुका है। प्रशासन द्वारा कर्मचारियों के हित में कोई भी सकारात्मक पहल नहीं की गई है। कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों का प्रशासन के मध्य वार्ता का दौर जारी करना चाहिए। प्रशासन से बात-चीत करने के लिए एक शिष्टमंडल का गठन भी होना चाहिए।

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कर्मचारी यूनियन के नेता धर्मेन्द बालियान ने कहा कि प्रशासन और कर्मचारी एक सिक्के के दो पहलू है। कर्मचारियों और प्रशासन के मध्य मांगों का सम्प्रेषण चलता रहना चाहिए।
यूनियन का दायित्व होता है कर्मचारी के कार्यों का समय से निष्पादन किया जा सके। कर्मचारियों की मांगों जब पूरी नहीं होती है तब प्रशासन हासिये पर आ जाता है। जिसके चलते कर्मचारी धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हो जाते है।

शत्रुध्न झां ने कहा कि कर्मचारियों का यूनियन पर विश्वास ही यूनियन के पदाधिकारियों की शक्ति है कर्मचारियों को धैर्य रखकर वार्ता जारी रखनी चाहिए जिससे कि विश्वविद्यालय का वातावरण अनुकूल बना रहे और विश्वविद्यालय आगे प्रगति की और बढ़ता रहे।
शिक्षकेत्तर कर्मचारी यूनियन के महामंत्री नरेन्द्र मलिक ने कहा कि प्रशासन के साथ मौखिक वार्ता का दौर अब समाप्त हो चुका है। मौखिक वार्ता का जो भी परिणाम सकारात्मक न मिलने के कारण आम सभा की बैठक करना यूनियन का परम दायित्व है। सोते हुए प्रशासन को जगाने का कार्य यूनियन के पदाधिकारी ही कर सकते है। सभागार की भीड़ को देखकर कर्मचारियों की शक्ति से प्रशासन से कान खुल जाएंगे।

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इस अवसर पर अनिरूद यादव, धनपाल, डॉ0 अनिल धीमान, बलवन्त, जितेन्द्र, नरेश त्यागी, मनोज कुमार, समीर राणा, गुरूप्रीत सिंह, वीरेन्द्र पटवाल, किशन कुमार, मदन, राजीव गुप्ता, संजय शर्मा, हेमन्त पाल, सचिन पाठक, कुलभूषण शर्मा, रमाकान्त शर्मा, उमा शंकर शर्मा आदि उपस्थित रहे। सभा का संचालन दीपक वर्मा ने किया।

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