उत्तराखंड

22 वर्षों बाद अब पूरा होगा राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण का सपना

प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिन्हित आंदोलनकारियों व उनके आश्रितों को बड़ी रहात दी है। 22 वर्षों बाद राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण का सपना पूरा होने जा रहा है। दरअसल, उत्तराखंड विधानसभामें बुधवार को एक विधेयक पेश किया गया जिसमें अलग राज्य के लिए आंदोलन के दौरान जेल जाने वाले या घायल होने वाले लोगों को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने का प्रस्ताव किया गया है।

एक बार के लिए मिलेगी छूट

यह भी पढ़ें 👉  खुलासा:मेडिकल स्टूडेंट्स के सुसाइड मामलों मे NMC का खुलासा,SGRR केस मे भी यही कारण शत प्रतिशत

उत्तराखंड आरक्षण विधेयक, 2023 उत्तराखंड आंदोलन के चिन्हित आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरियों में आयु सीमा और चयन प्रक्रिया में एक बार के लिए छूट देगा। इसमें श्रेणी सी और डी के पदों पर भर्ती शामिल है। दोनों भर्तियां उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के दायरे से बाहर हैं।

छूट की ये हैं शर्ते 

इस कानून में कहा गया है कि यह केवल उन आंदोलनकारियों पर लागू होगा जिन्हें आंदोलन के दौरान चोटें लगी थीं या कम से कम सात दिनों के लिए जेल गए थे। हालांकि आरक्षण पाने के लिए आंदोलनकारियों या उनके आश्रितों दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। प्रावधान है कि जो आंदोलनकारी 50 वर्ष से अधिक उम्र या किसी शारीरिक या मानसिक अक्षमता के कारण नौकरी करने के इच्छुक नहीं हैं, उनके परिवार के किसी एक आश्रित को इसका लाभ मिलेगा।

यह भी पढ़ें 👉  वेलडन:SGRR मेडिकल कॉलेज के मृदुल कैंसर रोगियों के लिए बने नई मिसाल

11 अगस्त 2004 से लागू माना जाएगा
त्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों का आरक्षण विधेयक  पूरे उत्तराखंड में लागू होगा और 11 अगस्त 2004 से लागू समझा जाएगा। यह अधिनियम राजकीय सेवाओं में सीधी भर्ती के पदों के संबंध में लागू होगा। इससे उन राज्य आंदोलनकारियों को लाभ होगा, जो आंदोलनकारी कोटे से सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे हैं। साथ ही उन आंदोलनकारियों को भी राहत मिलेगी, जिनका आयोगों के माध्यम से चयन हो गया था, लेकिन आरक्षण संबंधी शासनादेश के निरस्त होने के बाद उन्हें नियुक्ति नहीं मिल पाई थी।

यह भी पढ़ें 👉  लकड़ी तस्करों और वन विभाग की टीम में मुठभेड़, तस्कर के लगी गोली

Most Popular

To Top