उत्तराखंड

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में हाइपरटेंशन पर मंथन, देशभर के विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

देहरादून। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में विश्व हाइपरटेंशन दिवस के अवसर पर नेफ्रोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने हाई ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर” बताते हुए लोगों से समय रहते सतर्क रहने की अपील की। कार्यक्रम में युवाओं में तेजी से बढ़ते हाइपरटेंशन, अनियमित जीवनशैली और तनाव को गंभीर चिंता का विषय बताया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. जी. स्वर्णलथा, प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक, चिकित्सक अधीक्षक डॉ. गौरव रतूड़ी तथा नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान सरस्वती वंदना की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

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सीएमई में विशेषज्ञों ने कहा कि हाइपरटेंशन आज केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। डॉ. आलोक कुमार ने ब्लड प्रेशर की सही जांच पद्धति, शुरुआती लक्षणों की पहचान और संतुलित जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं डॉ. जी. स्वर्णलथा ने कहा कि समय पर जांच और नियमित उपचार से हाइपरटेंशन को नियंत्रित किया जा सकता है।

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पीजीआई चंडीगढ़ के डॉ. मनीष राठी ने अनियंत्रित ब्लड प्रेशर के उपचार पर जानकारी देते हुए बताया कि लापरवाही भविष्य में गंभीर हृदय एवं किडनी रोगों का कारण बन सकती है।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित पैनल चर्चा आकर्षण का केंद्र रही। विशेषज्ञों ने “रेसिस्टेंट हाइपरटेंशन”, गर्भावस्था में हाई बीपी, युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक और किडनी पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने चेताया कि फास्ट फूड, तनाव, कम शारीरिक गतिविधि और अनियमित दिनचर्या हाई ब्लड प्रेशर के बड़े कारण बन रहे हैं।

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एम्स ऋषिकेश, हिमालयन अस्पताल समेत विभिन्न संस्थानों से पहुंचे चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आधुनिक उपचार पद्धतियों और जागरूकता अभियानों को समय की आवश्यकता बताया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सकों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। अंत में डॉ. विवेक रूहेला ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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