उत्तराखंड

हिमालयन इंस्टीट्यूट में गूंजी टीबी जागरूकता की आवाज, नुक्कड़ नाटक से दिया बड़ा संदेश

देहरादून।Himalayan Institute of Medical Sciences में World TB Day के अवसर पर श्वसन चिकित्सा विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्रों और आम जनमानस को टीबी के लक्षण, जांच, उपचार और इससे जुड़े सामाजिक भेदभाव के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डीन डॉ. अहमदुल्ला शरीफ एवं निदेशक (अस्पताल सेवाएं) डॉ. हेम चंद्रा ने किया। इस दौरान नर्सिंग एवं बीएमएलटी छात्रों ने प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर टीबी मरीजों के साथ होने वाले भेदभाव, उनकी पीड़ा और समाज की जिम्मेदारी को सजीव रूप में दर्शाया।

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अस्पताल परिसर में टीबी जांच, फेफड़ों के व्यायाम (पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन) और संतुलित खानपान संबंधी परामर्श के लिए विशेष काउंटर लगाए गए। “आशा की दीवार” कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही, जहां टीबी से ठीक हो चुके मरीजों ने अपने अनुभव साझा करते हुए दूसरों को हिम्मत और सकारात्मक संदेश दिया। साथ ही छात्रों द्वारा तैयार किए गए जागरूकता पोस्टरों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

डीन डॉ. अहमदुल्ला शरीफ ने कहा कि “टीबी का समय पर इलाज पूरी तरह संभव है, जरूरत है तो केवल सही जानकारी और जागरूकता की।” वहीं निदेशक डॉ. हेम चंद्रा ने जोर देते हुए कहा कि “टीबी मरीजों के प्रति समाज को सहयोगात्मक और संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए, ताकि वे बिना किसी डर के उपचार करा सकें।”

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विभागाध्यक्ष डॉ. रेखी खंडूरी ने बताया कि लगातार खांसी, बुखार और तेजी से वजन कम होना टीबी के प्रमुख लक्षण हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत जांच करानी चाहिए।

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इससे पूर्व एमबीबीएस छात्रों के लिए एक विशेष शिक्षण सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें एक वास्तविक टीबी मरीज का केस प्रस्तुत कर इंटरएक्टिव सवाल-जवाब के माध्यम से छात्रों की समझ को और मजबूत किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. अनुराधा कुसुम, डॉ. सुशांत खंडूरी, डॉ. वरूणा जेठानी, डॉ. मनोज कुमार सहित कई विशेषज्ञों ने भी लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करते हुए समय पर जांच और इलाज का संदेश दिया।

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