उत्तराखंड

सीएम धामी करेंगे औपचारिक रूप से विधिवत शुभारंभ, ऐसाे होगा संचालन…

New Education Policy: उत्तराखंड में आज से नई शिक्षा नीति लागू होने जा रही है। सीएम धामी  (CM Pushkar Singh Dhami) आज राज्य में नई शिक्षा नीति का शुभांरभ करेंगे। जिसके साथ ही उत्तराखंड नई शिक्षा नीति लागू (new education policy implemented)  करने वाला देश में पहला राज्य बन जाएगा। इस नीति के तहत शिक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बताया जा रहा है कि अभी तक स्कूलों में जो सिस्टम था उस पैटर्न को नई शिक्षा नीति में बदला गया है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार शिक्षा महानिदेशालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) बालवाटिकाओं का उद्घाटन कर सूबे में नई शिक्षा नीति का औपचारिक रूप से विधिवत शुभारंभ करेंगे। पहले चरण में प्राथमिक स्कूलों में चल रहे पांच हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों में बाल वाटिकाओं का संचालन शुरू होगा। विकासखंड स्तर पर क्षेत्रीय विधायक एवं स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चिह्नित आंगनबाड़ी केन्द्रों में बाल वाटिकाओं का शुभारंभ किया जाएगा। इसमें शिक्षाविद्, अभिभावक एवं छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहेंगे।

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बताया जा रहा है कि नई शिक्षा नीति में नए पैटर्न को इसमें फॉलो किया जाएगा, जिसमें 3 से 8, 8 से 11, 11 से 14 और 14 से 18 साल की उम्र के बच्चे शिक्षा लेंगे। इस नीति को स्कूल, कॉलेज में फेज वाइज शुरू किया जा रहा है। सभी स्कूलों में प्राइमरी क्लास से ही बाल वाटिका के तौर पर इसे शुरू किया जायेगा।  यह National Education Policy 2014 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का घोषणा पत्र में शामिल था।

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नई शिक्षा व्यवस्था को कई मायनों में अहम माना जा रहा है। उत्तराखण्ड में भी एनईपी को लेकर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों में उत्साह है। ऐसे में बड़े बदलाव के साथ- साथ यह टीचर्स के लिए काफी चैलेन्जिग होने जा रहा है। एजुकेशन फील्ड से जुड़े लोगों का मानना है कि पहले सिर्फ किताबी ज्ञान को माध्यम मानते हुए स्टूडेंट्स की काबिलियत का आंकलन किया जाता था, लेकिन नेशनल एजुकेशन पॉलिसी समझ को प्राथमिकता देती है।

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इस नीति के तहत ग्रेजुएशन कोर्स 3 या 4 साल के हो सकते हैं, जिसमें एग्जिट ऑप्शन भी होगा। अगर स्टूडेंट्स ने 1 साल ग्रेजुकेशन कोर्स में पढ़ाई की है तो उसे सर्टिफिकेट दिया जाएगा। 2 साल के बाद एडवांस डिप्लोमा दिया जाएगा। 3 साल के बाद डिग्री दी जाएगी और 4 साल के बाद रिसर्च के साथ बैचलर की डिग्री प्रदान कर दी जाएगी।

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