उत्तराखंड

शिक्षा में तकनीक और नवाचार की मिसाल बने डॉ. आशीष रतूड़ी, एससीईआरटी ने थपथपाई पीठ

देहरादून। शिक्षा का वास्तविक रूपांतरण केवल पाठ्यक्रम बदलने से नहीं, बल्कि शिक्षकों को समय की जरूरतों के अनुरूप ज्ञान, तकनीक और नवाचार से सशक्त बनाने से होता है। उत्तराखंड में इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच डॉल्फिन (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, देहरादून के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) समन्वयक एवं भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष रतूड़ी को सम्मानित किया गया है। शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में उनके योगदान को मान्यता देते हुए विद्यालयी शिक्षा विभाग, उत्तराखंड सरकार तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। सम्मान समारोह 21 अक्टूबर को एससीईआरटी, देहरादून में आयोजित हुआ।

डॉ. रतूड़ी को यह सम्मान प्रदेश के राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए संचालित ई-सृजन (e-Srijan) MOOCs 1.0 एवं 2.0 कार्यक्रममें विषय विशेषज्ञ, समीक्षक और तकनीकी सहयोगी के रूप में उनकी भूमिका के लिए दिया गया। यह पहल डिजिटल माध्यमों के जरिए शिक्षक क्षमता संवर्धन का ऐसा प्रयास है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सूचना-संचार प्रौद्योगिकी (ICT) को शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ते हुए शिक्षकों को आधुनिक शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया है।

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ई-सृजन कार्यक्रम की व्यापक पहुंच इसकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसमें उत्तराखंड के 99 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों ने सहभागिता की है। यह आंकड़ा प्रदेश में डिजिटल शिक्षक प्रशिक्षण की स्वीकार्यता और व्यापकता को रेखांकित करता है। कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर SKOCH Gold Award 2026 से सम्मानित किया गया, जबकि AI for Education Awards 2026 में इसे ग्लोबल फाइनलिस्ट के रूप में स्थान मिला। इसके अतिरिक्त, इस पहल को हांगकांग में आयोजित होने वाले UNESCO Learning Innovations and Emerging Technologies (LIET) Conference 2026 में प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया है।

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इन उपलब्धियों के बीच डॉ. रतूड़ी का सम्मान शिक्षा में नवाचार को जमीन पर उतारने वाले अकादमिक और तकनीकी योगदान के महत्व को सामने लाता है। शिक्षक प्रशिक्षण अब केवल पारंपरिक कक्षाओं तक सीमित नहीं है; डिजिटल मंचों, तकनीकी संसाधनों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग ने शिक्षण की संभावनाओं का विस्तार किया है। ऐसे में शिक्षकों को इन बदलावों के लिए तैयार करना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है।

सम्मान प्राप्त करने पर डॉ. आशीष रतूड़ी ने विद्यालयी शिक्षा विभाग और एससीईआरटी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सशक्त बनाना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, इस तरह की पहल शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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डॉ. रतूड़ी की इस उपलब्धि से डॉल्फिन संस्थान में उत्साह का माहौल है। संस्थान और एससीईआरटी उत्तराखंड शिक्षक क्षमता संवर्धन, डिजिटल शिक्षा, नवीन शिक्षण पद्धतियों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन से संबंधित गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं। दोनों के बीच शैक्षणिक समन्वय का व्यापक उद्देश्य विद्यालयी और उच्च शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा प्रदेश में नवाचार आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।

डॉ. आशीष रतूड़ी को मिला यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षक सशक्तीकरण और तकनीक आधारित शिक्षा को आगे बढ़ाने वाले प्रयासों की पहचान के रूप में भी देखा जा रहा है। ई-सृजन जैसे कार्यक्रम इस बात को रेखांकित करते हैं कि डिजिटल नवाचार का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका लाभ शिक्षकों तक पहुंचे और उसके माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सार्थक सुधार का मार्ग प्रशस्त हो।

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