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आस्था: पीताम्बरी देवी जयंती आज, इस पूजा विधि से होगी अर्चना, मिलेगा सबकुछ…

आज सोमवार को बगलामुखी जयंती है। ग्रंथों के अनुसार वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की अष्टमी को देवी बगलामुखी प्रकट हुईं थीं। इस कारण इस तिथि को बगलामुखी जयंती के रुप में मनाया जाता है। मां बगुलामुखी दस महाविद्याओं में से एक हैं। ग्रंथों मे इनका रंग पीला बताया गया है और इन्हें पीला रंग पसंद है इसलिए इनका एक नाम पितांबरा भी है।

पितांबरा: दशमहाविद्याओं में आठवीं

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देवी बगलामुखी को पीला रंग प्रिय है। इसलिए इनका एक नाम पितांबरा भी है। ये रंग पवित्रता, आरोग्य और उत्साह का रंग माना जाता है। इनकी पूजा में पीले रंग के कपड़े, फूल, आसन, माला, मिठाई और अन्य सामग्रियों का रंग भी पीला ही होता है। रोग से बचने के लिए हल्दी और केसर से देवी बगलामुखी की विशेष पूजा करनी चाहिए। देवी दुर्गा की दश महाविद्याओं में ये आठवीं हैं। खासतौर से इनकी पूजा से दुश्मन, रोग और कर्ज से परेशान लोगों को लाभ मिलता है।

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व्रत और पूजा की विधि

सुबह जल्दी उठकर नहाएं और पीले रंग के कपड़े पहनें।

पूर्व दिशा में उस स्थान पर गंगाजल छीड़के जहां पर पूजा करना है।

उस जगह पर एक चौकी रख कर उस पर माता बगलामुखी की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। इसके बाद आचमन कर हाथ धोएं और पानी छींटकर आसन पवित्र करें।

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हाथ में पीले चावल, हल्दी, पीले फूल और दक्षिणा लेकर माता बगलामुखी व्रत का संकल्प करें। माता की पूजा खासतौर से पीले फल और पीले फूल से करें।

धूप, दीप लगाएं। फिर पीली मिठाई का प्रसाद चढ़ाएं।

व्रत के दिन निराहार रहना चाहिए। रात्रि में फलाहार कर सकते हैं। अगले दिन पूजा करने के बाद ही भोजन करें।

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