उत्तराखंड

बड़े घोटाले में फंस गए बड़े अफसरों के बड़े बुजुर्ग, अब सीएम धामी ने दे दिया बड़ा बयान…

देहरादूनः उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में सैकड़ों एकड़ चिटहरा भूमि जमीन घोटाले के मामले में कई चौकाने वाले खुलासे हुए है। मामले में आईएएस मीनाक्षी सुंदरम, आईएएस बृजेश संत और आईपीएस राजीव स्वरूप के परिजनों के नाम सामने आए हैं। ये सभी अधिकारी हरिद्वार जिले में डीएम और एसएसपी के पद पर तैनात रह चुके हैं। उत्तराखंड के अधिकारियों के परिजनों के फंसे होने पर सीएम धामी का बड़ा बयान सामने आया है। सीएम धामी ने कहा कि यह प्रदेश से बाहर का मामला है। हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर इतना जरूर कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मामले में यूपी की पूरी मदद की जाएगी।

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मीडिया रिपोर्टस के अनुसार गैंगस्टर यशपाल तोमर ने ऐसे ही 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति खड़ी नहीं कर दी थी, इसमें उसके साथ उत्तराखंड के बड़े आईएएस और आईपीएस अधिकारियों का भी गठजोड़ सामने आ रहा है। यशपाल तोमर ने उत्तराखंड के बड़े आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के परिजनों के नाम पर भी करोड़ों रुपए की संपत्ति खरीदी है। इसका खुलासा यूपी के ग्रेटर नोएडा जिले के दादरी थाने में दर्ज हुए मुकदमे में हुआ है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के सचिव मुख्यमंत्री आईएएस मीनाक्षी सुंदरम के ससुर एम भास्करन का नाम FIR में शामिल है। एमडीडीए (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण) सचिव आईएएस बृजेश संत के पिता का केएम संत उर्फ खचेरमल का नाम FIR में शामिल है। उत्तराखंड के डीआईजी राजीव स्वरूप की माता सरस्वती देवी का नाम FIR में शामिल है। मीनाक्षी सुंदरम हरिद्वार में जिलाधिकारी रह चुके हैं। राजीव स्वरूप दो बार हरिद्वार में कप्तान रह चुके हैं और बृजेश संत हरिद्वार के डीएम रह चुके हैं।

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बताया जा रहा है कि इस खुलासे के बाद उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में खलबली मची हुई है। ये तीनों अधिकारी हरिद्वार में डीएम और एसएसपी के पद पर तैनात रहे हैं। वहीं सीएम धामी ने मीडिया द्वारा चिटहरा भूमि घोटाले पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि यह प्रदेश से बाहर का मामला है। हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले पर इतना जरूर कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मामले में यूपी की पूरी मदद की जाएगी। यानी इशारों ही इशारों में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्रवाई की बात कह दी है। कानून अपना काम कर रहा है और जरूरत पड़ी तो इस पर प्रदेश सरकार भी जांच करेगी।

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