देहरादूनः होली का त्योहार आने वाला है और आप होलिका दहन की सही तिथि या मुर्हत नहीं जानते है तो हम आपको ज्योतिषानुसार होली से जुड़ी जानकारी बता रहें है। उत्तराखंड में इस बार होलिका दहन 17 मार्च को होगा। जबकि रंग 19 मार्च को खेला जाएगा। होलिका दहन का मुहूर्त इस बार रात 9 बजकर 03 मिनट से रात 10 बजे 13 मिनट तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि 17 मार्च को दिन में 1 बजकर 29 बजे शुरू होगी और पूर्णिमा तिथि का समापन 18 मार्च दिन में 12 बजकर 46 मिनट पर होगा। वहीं, पंडितों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार भद्रा लगने की वजह से होलिका दहन 17 मार्च और होली 19 मार्च को होगी।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक होलिका दहन फागुन मास की पूर्णिमा को प्रदोष काल में भद्रा रहित मुहूर्त में किया जाता है, क्योंकि भद्रा को और अशुभ और मंगलकारी माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार 17 मार्च को दोपहर 1:20 से रात्रि के द्वितीय पहर तक भद्रा रहेगा। लेकिन भद्रा के अंतिम पड़ाव को दोष रहित माना जाता है। ऐसे में होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त रात्रि 9:04 से रात्रि 10:20 तक रहेगा। इस बीच 18 मार्च को दोपहर 12: 47 मिनट तक पूर्णमासी और आएगी उसके बाद प्रतिबद्धा लगेगी। जबकि 19 मार्च को सूर्योदय से लेकर 11:38 तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। इसी अवधि में होली खेली जाएगी। साथ ही मान्यताओं के अनुसार ये भी बता रहें है कि होलिका दहन में क्या गलतियां करने से अशुभ होता है। पढ़े..
होलिका दहन में भूलकर भी न करें ये काम
मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि को जलते हुए शरीर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए किसी भी नवविवाहिता को ये अग्नि नहीं देखनी चाहिए। इसे अशुभ माना गया है। इससे उनके वौवाहिक जीवन में दिक्कतें शुरू हो सकती हैं। होलिका दहन वाले दिन किसी भी व्यक्ति को पैसा उधार देने की मनाही होती है. ऐसा करने से घर में बरकत नहीं होती और व्यक्ति की आर्थिक समस्याएं बढ़नी शुरू हो जाती हैं। इतना ही नहीं, इस दिन उधार लेने से भी परहेज करें। मान्यता है कि माता-पिता की इकलौती संतान होने पर होलिका दहन की अग्नि को प्रज्जवलित करने से बचें। इसे शुभ नहीं माना जाता। एक भाई और एक बहन होने पर होलिका की अग्नि को प्रज्जवलित किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन होलिका दहन के लिए पीपल, बरगद या आम की लकड़ियों का इस्तेमाल न करें। ये पेड़ दैवीय और पूजनीय पेड़ हैं। साथ ही इस मौसम में इन वृक्षों पर नई कोपलें आती हैं, ऐसे में इन्हें जलाने से नकारात्मकता फैलती है। होलिका दहन के लिए गूलर या अरंड के पेड़ की लकड़ी या उपलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कहते हैं कि इस दिन अपनी माता का आशीर्वाद जरूर लें। उन्हें कोई उपहार लाकर दें, ऐसा करने से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा बनी रहती है। किसी भी महिला का भूलकर भी अपमान न करें।


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