उत्तराखंड

एसआरएचयू में मेडिकल लाइब्रेरीज के भविष्य पर मंथन, 17 संस्थानों के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

देहरादून/डोईवाला। चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के बदलते परिदृश्य में मेडिकल लाइब्रेरीज की भूमिका अब पारंपरिक पुस्तक संग्रह तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक सूचना संसाधनों के बढ़ते प्रभाव के बीच स्वास्थ्य विज्ञान पुस्तकालयों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की जरूरत पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की परिचर्चा में व्यापक विमर्श हुआ। वोल्टर्स क्लूवर के सहयोग से आयोजित इस राउंड टेबल चर्चा में एम्स, आईआईटी और आईआईएसईआर सहित 17 संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लेकर मेडिकल लाइब्रेरीज के आधुनिकीकरण और ज्ञान प्रबंधन की भावी चुनौतियों पर विचार साझा किए।

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विश्वविद्यालय के बीसी रॉय सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. स्वामी राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस दौरान कुलपति डॉ. प्रसाद ए. वाडेगांवकर ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार के लिए आधुनिक एवं सशक्त ज्ञान तंत्र विकसित करना समय की आवश्यकता है। मेडिकल लाइब्रेरीज को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल संसाधनों और नवीन तकनीकों से जोड़कर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा शोधकर्ताओं की बदलती जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित करनी होंगी।

प्रति कुलपति डॉ. ए.के. देवरारी ने कहा कि आधुनिक मेडिकल लाइब्रेरीज शिक्षण, अनुसंधान और क्लीनिकल प्रैक्टिस के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरी हैं। साक्ष्य आधारित चिकित्सा पद्धति में विश्वसनीय शोध सामग्री और अद्यतन वैज्ञानिक जानकारियों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में पुस्तकालयों के बीच बेहतर समन्वय और सफल कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान ज्ञान प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकता है।

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परिचर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, ई-रिसोर्सेज की उपलब्धता, शोधकर्ताओं को तकनीकी सहयोग, उपयोगकर्ता केंद्रित सेवाओं और संसाधनों की साझेदारी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप पुस्तकालय प्रबंधन के नए मॉडल विकसित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

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कार्यक्रम के समन्वयक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष योगेन्द्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विज्ञान पुस्तकालयों को अधिक उपयोगी और प्रभावी बनाने के लिए संस्थानों के बीच सहयोग तथा अनुभवों का आदान-प्रदान जरूरी है। ऐसे आयोजन पुस्तकालय सेवाओं में नवाचार और गुणवत्ता सुधार के लिए साझा मंच उपलब्ध कराते हैं।

परिचर्चा में सामने आए विचारों ने स्पष्ट किया कि भविष्य की मेडिकल लाइब्रेरीज केवल सूचना संग्रह के केंद्र नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्य आधारित उपचार को सहयोग देने वाले महत्वपूर्ण ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित होंगी। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के 17 मेडिकल लाइब्रेरियन और विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

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