उत्तराखंड

SRHU जॉलीग्रांट में श्रद्धा से हुआ विश्वकर्मा पूजन, श्रम और कौशल को राष्ट्र निर्माण की शक्ति बताया

देहरादून/डोईवाला। सृजन, शिल्प और तकनीकी दक्षता के प्रतीक भगवान विश्वकर्मा की पूजा स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (SRHU), जॉलीग्रांट में श्रद्धा और गरिमापूर्ण वातावरण में की गई। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में जहां धार्मिक आस्था की झलक दिखाई दी, वहीं श्रम, कौशल और तकनीकी संसाधनों के प्रति सम्मान का भाव भी प्रमुखता से उभरा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग एवं मोटर ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहभागिता की।

समारोह में SRHU के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा और कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना एवं यज्ञ में सहभागिता की। इस दौरान विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. स्वामी राम का भी स्मरण किया गया।

अपने संबोधन में डॉ. विजय धस्माणा ने निर्माण और सृजन से जुड़े सभी कामगारों को विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा को सृजन एवं शिल्प का देवता तथा दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान अथवा राष्ट्र की प्रगति केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि मानव श्रम, कौशल और समर्पण से आकार लेती है। उन्होंने कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे अपनी कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता के माध्यम से विश्वविद्यालय के साथ-साथ राज्य और राष्ट्र के विकास में योगदान दें।

विश्वकर्मा पूजन के दौरान इंजीनियरिंग एवं मोटर ट्रांसपोर्ट विभाग में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और तकनीकी उपकरणों की साफ-सफाई कर उनका विधिवत पूजन किया गया। पूजा के बाद प्रसाद वितरित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. प्रकाश केशवया, इंजीनियरिंग विभाग के डीजीएम आरपीएस रावत, गिरीश उनियाल, रुपेश महरोत्रा, रोशन नौगाईं और अमरेंद्र कुमार समेत विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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