उत्तराखंड

भारतीय सरकार में शक्ति का सफर: IAS राधा रतूड़ी की पत्रकारिता से मुख्य सचिव तक



IAS राधा रतूड़ी का पत्रकारिता से मुख्य सचिव तक का सफर

राधा रतूड़ी उत्तराखंड की पहली महिला मुख्यसचिव बन गई हैं अब आप लोगों को भी जानने की उत्सुकता जरूर होगी की राधा रतूड़ी हैं कौन , तो चलिए आपको उनके बारे में और उनके सफर के बारे में विस्तार से बताते हैं

पत्रकारिता से सफर शुरू करने वाली वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राधा रतूड़ी उत्तराखंड की पहली महिला मुख्य सचिव बन गई हैं।
मध्य प्रदेश की बेटी और उत्तराखंड की बहू राधा रतूड़ी अपनी सादगी सौम्यता और ईमानदार छवि के लिए जानी जाती हैं। आईएएस राधा रतूड़ी अपनी संस्कृति से भी खासा लगाव रखती हैं। पढ़ने-लिखने की शौकीन होने के साथ ही लोकगीतों के प्रति भी उनका लगाव कई मंचों पर झलकता है।
राधा रतूड़ी 1988 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। और उत्तराखंड के पूर्व DGP डॉ अनिल रतूड़ी की धर्मपत्नी हैं ,

मुंबई से पोस्ट ग्रेजुएट मास कम्युनिकेशन करने के बाद राधा रतूड़ी ने इंडियन एक्सप्रेस मुंबई में ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद उन्होंने इंडिया टुडे मैगजीन में भी काम किया। 1985 में अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने के साथ ही उन्होंने सिविल सर्विसेज में जाने की तैयारी भी अपने पिता की सलाह पर राधा रतूड़ी ने यूपीएससी की तैयारी की। उन्हें इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस में सफलता मिली। 1985-86 में नियुक्ति के लिए राधा रतूड़ी दिल्ली गईं, लेकिन उनको दिल्ली रास नहीं आई। उन्होंने एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया। यहां अगले ही प्रयास में राधा रतूड़ी को इंडियन पुलिस सर्विस में जगह बनाने में कामयाबी मिली। 1987 में राधा रतूड़ी आईपीएस में चयनित होने के बाद हैदराबाद में ट्रेनिंग के लिए गई थीं, जहां उनकी मुलाकात 1987 बैच के ही आईपीएस अनिल रतूड़ी से हुई। यहां से दोस्ती का सफर शुरू हुआ और दोनों की शादी हो गई

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इंडियन पुलिस सर्विस में बार-बार तबादलों के कारण पति-पत्नी को अक्सर तैनाती के लिए अलग-अलग स्थान पर रहना पड़ा। इसके बाद राधा रतूड़ी ने आईएएस के लिए प्रयास किया। 1988 में राधा रतूड़ी ने ias का एक्जाम क्रैक किया उस समय आईपीएस अनिल रतूड़ी उत्तर प्रदेश में तैनाती पर थे। जबकि मध्य प्रदेश बैच की टॉपर होने के कारण राधा रतूड़ी को मध्य प्रदेश कैडर मिला। इस तरह एक बार फिर दोनों के सामने अलग-अलग राज्यों में तैनाती को लेकर बड़ी चुनौती सामने आई। इसके बाद राधा रतूड़ी ने उत्तर प्रदेश कैडर में जाने के लिए प्रयास शुरू किया। करीब 1 साल बाद राधा रतूड़ी को उत्तर प्रदेश का कैडर मिला।

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आईएएस में चयन के बाद राधा रतूड़ी ने देश के चार राज्यों में अपनी सेवाएं दिया। मध्य प्रदेश में काम करने के बाद कैडर चेंज हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश के बरेली में पोस्टिंग मिली। इस दौरान आईपीएस अनिल रतूड़ी के नेशनल पुलिस अकादमी हैदराबाद में जाने पर राधा रतूड़ी ने स्टडी लीव ले ली। इसके बाद वह प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश में पोस्टिंग लेकर 2 साल जॉइंट सेक्रेटरी के रूप में सेवारत रहीं। वर्ष 1999 में वह वापस उत्तर प्रदेश आ गई। 9 नवंबर 2000 को जब उत्तराखंड राज्य अलग राज्य के रूप में स्थापित हुआ तो राधा रतूड़ी ने उत्तराखंड कैडर ले लिया। इसके बाद से अब तक उत्तराखंड में सेवाएं दे रहीं हैं।

आपको बता दें कि राधा रतूड़ी देहरादून, टिहरी जैसे ज़िलों के ज़िलाधिकारी का पद भी सँभाल चुकी हैं. उत्तराखंड राज्य के शीर्षस्थ पद पर पहली महिला अधिकारी होने के साथ-साथ राज्य के इतिहास में ऐसा भी पहली बार हुआ है जब पति—पत्नी दोनों शीर्ष पदों तक पहुंचे हों. आपको बता दें कि उनके पति अनिल रतूड़ी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे हैं जो प्रदेश में पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी सँभालने के बाद नवंबर 2020 को सेवानिवृत्त हुए हैं.

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कलेक्टर के नाते उनका एक विस्थापित गाँव में जाना हुआ.
लोग गुस्से से भरे बैठे थे, और एक ग्रामीण वृद्ध महिला ने खड़े होकर कलेक्टर को खरी खोटी सुनाना शुरू कर दिया.
उस क्रोधित रण चंडी को दबोचने ज्यों ही महिला पुलिस लपकी, तो कलेक्टर ने उन्हें रोकते हुए अपना सम्बोधन शुरू किया – मैं आपकी ( टिहरी जनपद की ) बहू हूँ, और सास तो गुस्से में बहू को बुरा भला कहती ही है. अतः आपका फर्ज़ गाली देने का है, और मेरा सुनने का.
कहने की आवश्यकता नहीं, कि सारा वातावरण स्नेहिल हो गया, और ग्रामीणों की समस्याओं का भी समाधान हुआ.

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