उत्तराखंड

नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में उमड़ी भीड़, हो रही शैलपुत्री की आराधना

आश्विन शुक्ल पक्ष के शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो चुके हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से शुरू होंगे और दशहरे के साथ 24 अक्टूबर को इसका समापन होगा। इसे शक्ति प्राप्त करने की नवरात्रि भी कहा जाता है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की आराधना की जा रही है। घरों में पूजा अर्चना के साथ ही मंदिरों में माता की प्रतिमा का श्रृंगार किया जा रहा है श्रद्धालुओं ने घरों पर मां भगवती की चौकी लगाकर कलश स्थापना की। फूलों व लड़ियों से सजे मंदिरों में भी भक्तों ने जाकर पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। दुर्गा सप्तशती व दुर्गा चालीसा के पाठ किए गए। शाम को भजन कीर्तन होंगे।

सुबह से मंदिरों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

यह भी पढ़ें 👉  SGRRU परिवार का गौरव: गोपेश्वर के आलेख परमार ने प्रथम प्रयास में हासिल किया IIT मुंबई में प्रवेश

आज नवरात्रि के पहले दिन पूरे देश के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार के मंदिरों में भी मां शैलपुत्री की उपासना चल रही है। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की खासी उमड़ रही है। मां मनसा देवी मंदिर में सुबह से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचने शुरू हो गए और लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। इस दौरान मंदिर परिसर माता के जयकारों से गुंजायमान रहा। हर साल नवरात्रि में मां मनसा देवी मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं।

मां मनसा देवी मंदिर में लगा भक्तों का तांता

हरिद्वार का मां मनसा देवी का मंदिर विश्व प्रसिद्ध हैं, जो सिद्ध पीठ भी है। यहा मां के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु मां मनसा की सच्चे मन से उपासना करता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। मां मनसा के मंदिर का वर्णन पुराणों में मिलता है। नवरात्रि के पहले दिन मां मनसा देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचने शुरू हो गए और लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। इस दौरान मां के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया।

यह भी पढ़ें 👉  SGRRU परिवार का गौरव: गोपेश्वर के आलेख परमार ने प्रथम प्रयास में हासिल किया IIT मुंबई में प्रवेश

मां ने महिषासुर का किया था वध

पुराणों में कहा गया है कि मां मनसा देवी महर्षि कश्यप की मानस पुत्री थी। एक बार महिषासुर नाम के राक्षस का अत्याचार देव लोक के साथ ही पृथ्वी पर भी बढ़ गया। उसके अत्याचारों से पूरे देवलोक में हाहाकार मचा हुआ था। सभी देवता महिषासुर के अत्याचारों से परेशान हो उठे थे। उससे बचने का कोई रास्ता उन्हें नहीं दिखाई दे रहा था। तब देवताओं ने मां भगवती की स्तुति की। मां भगवती दुर्गा ने रूप बदल कर महिषासुर का वध किया और पृथ्वी लोक के साथ ही देवताओं को महिषासुर से मुक्ति दिलाई। महिषासुर का वध करने के बाद मां भगवती ने इसी स्थान पर आकर विश्राम किया था और फिर से अपने स्त्री रूप में आई थी। मां दुर्गा ने महिषासुर से मुक्ति दिलाकर देवताओं के मन की इच्छा पूरी की थी। इसलिए मां मनसा देवी कहलाई, तभी से यहां पर उन्हें पूजा जाता है।

यह भी पढ़ें 👉  SGRRU परिवार का गौरव: गोपेश्वर के आलेख परमार ने प्रथम प्रयास में हासिल किया IIT मुंबई में प्रवेश

The Latest

To Top