उत्तराखंड

फंगल संक्रमण के खिलाफ हिम्स जौलीग्रांट की निर्णायक पहल, राष्ट्रीय मंच पर जुटे चिकित्सा जगत के दिग्गज

डोईवाला/देहरादून । तेजी से उभरते फंगल संक्रमण और उससे जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स), जौलीग्रांट एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा विमर्श का केंद्र बनकर उभरा। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से इंडियन सोसाइटी ऑफ मेडिकल माइकोलॉजिस्ट्स (आईएसएमएम) के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सीएमई सह कार्यशाला “बेसिक सेंसिटाइजेशन इन माइकोलॉजी” में देशभर के चिकित्सकों, माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स, शोधकर्ताओं और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लेकर फंगल संक्रमण की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और अत्याधुनिक जांच तकनीकों पर व्यापक मंथन किया।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के आदिकैलाश सभागार में आयोजित उद्घाटन सत्र में अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने कहा कि बदलती स्वास्थ्य परिस्थितियों और लगातार सामने आ रही नई संक्रमण संबंधी चुनौतियों के बीच चिकित्सकों का निरंतर प्रशिक्षण और नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों से स्वयं को अद्यतन रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की आधारशिला ज्ञान और कौशल के सतत विकास पर टिकी होती है।

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विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि हिम्स में आयोजित ऐसे राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम केवल ज्ञान के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि शोध, नवाचार और विभिन्न चिकित्सा विषयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान तलाशने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आईएसएमएम की सचिव एवं यूसीएमएस-जीटीबी अस्पताल, नई दिल्ली की विभागाध्यक्ष डॉ. शुक्ला दास ने कहा कि देश में इनवेसिव फंगल संक्रमण के मामलों में लगातार वृद्धि चिंता का विषय है। ऐसे समय में संक्रमण की शीघ्र पहचान, सटीक प्रयोगशाला जांच, एंटीफंगल दवाओं का विवेकपूर्ण उपयोग तथा स्वास्थ्यकर्मियों का नियमित प्रशिक्षण मरीजों की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।

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कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में डॉ. प्रतिभा काले, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. देबाशीष बिस्वास, डॉ. राखी खंडूड़ी सहित देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने आधुनिक माइकोलॉजिकल डायग्नोस्टिक तकनीकों, प्रयोगशाला प्रक्रियाओं और उपचार संबंधी नवीनतम शोध पर विस्तृत व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों को अत्याधुनिक जांच पद्धतियों का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया, जिससे प्रयोगशाला स्तर पर उनकी व्यावहारिक दक्षता को और मजबूत बनाया जा सके।

कार्यशाला का आयोजन अध्यक्ष डॉ. आरती कोटवाल और आयोजन सचिव डॉ. मालविका सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। आयोजन की सफलता में डॉ. गरिमा मित्तल, डॉ. राजेंद्र पंवार, डॉ. नूपुर कौल, डॉ. पीयूष कुमार राय, डॉ. अर्पणा सिंह, डॉ. मीनाक्षी सिंह, डॉ. अरुषि गुप्ता तथा डॉ. विक्रम सेठी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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इस अवसर पर हिम्स के डीन डॉ. अहमदुल्ला शरीफ, डॉ. विजेंद्र चौहान, डॉ. रेनू धस्माणा सहित विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, छात्र-छात्राएं और देशभर से आए प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि बढ़ते फंगल संक्रमण के दौर में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समय पर निदान और प्रशिक्षित चिकित्सा तंत्र ही प्रभावी स्वास्थ्य सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल बन सकते हैं।

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