जन स्वास्थ्य की राष्ट्रीय धुरी बना हिम्स, डॉ. शैली व्यास को दो प्रतिष्ठित फेलोशिप
डोईवाला/देहरादून । जन स्वास्थ्य और सामुदायिक चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए Himalayan Institute of Medical Sciences (हिम्स) की वरिष्ठ चिकित्सक एवं शिक्षाविद् डॉ. शैली व्यास ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है। वर्ष 2026 में उन्हें देश की दो प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा राष्ट्रीय फेलोशिप सम्मान प्रदान किए गए हैं। यह उपलब्धि न केवल हिम्स जौलीग्रांट बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।
हिम्स के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में कार्यरत डॉ. शैली व्यास को Indian Association of Preventive and Social Medicine के राष्ट्रीय सम्मेलन आईएपीएसएमकॉन-2026 में प्रतिष्ठित “आईएपीएसएम फेलोशिप” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें जन स्वास्थ्य नीति, सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता, शोध और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। सम्मान समारोह में डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि Dr. Arvind Mathur, आईएपीईएम अध्यक्ष Dr. Ashok Bhardwaj तथा आईएपीएसएम सचिव Dr. Manish Kumar Singh सहित देशभर के जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।
इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश में आयोजित Indian Public Health Association के राष्ट्रीय सम्मेलन में भी डॉ. शैली व्यास को “आईपीएचए फेलोशिप” से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण, साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली और युवा चिकित्सकों के मार्गदर्शन में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिए दिया गया।
चिकित्सा शिक्षा और जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉ. शैली व्यास की सक्रियता लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने तथा चिकित्सा विद्यार्थियों को जनसेवा के प्रति प्रेरित करने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से सराहा जाता है। उनके नेतृत्व में कई जनस्वास्थ्य आधारित कार्यक्रमों और शोध कार्यों ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
इस उपलब्धि पर Swami Rama Himalayan University के अध्यक्ष Dr. Vijay Dhasmana ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. शैली व्यास ने अपने समर्पण, शोध और सेवा भावना से हिम्स परिवार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।


