उत्तराखंड

PM मोदी के केदारनाथ दौरे की तैयारियां पूरी, पुलिस सुरक्षा तंत्र सतर्क, दून से केदारनाथ तक ये रहेंगी व्यवस्था

देहरादूनः दीपावली के अगले दिन यानी 5 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा पर आ रहे हैं। पीएम के दौरे को देखते हुए शासन प्रशासन की तैयारियाँ तेज हो गई है। पीएम के दौरे का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। सीएम धामी केदारनाथ में तमाम तैयारियों का जायजा लेते हुए तीर्थ पुरिहितों से मुलाकात कर लौटे हैं तो वहीं इस दौरे के तहत उत्तराखंड पुलिस सुरक्षा तंत्र द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था जमीन से लेकर आसमान तक की जा रही है। इतना ही नहीं केदारनाथ धाम में देवस्थानम बोर्ड के विरोध में आंदोलित पंडा-पुरोहित जैसे प्रदर्शनकारियों द्वारा किसी तरह का कोई विघ्न इस कार्यक्रम में न आए, इसको लेकर भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था बना पैनी नजर रखी जा रही है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी की यह 5वीं केदारनाथ यात्रा है। इसको लेकर देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लेकर रुद्रप्रयाग के केदारनाथ धाम तक सैकड़ों की तादात में पुलिस इंटेलिजेंस और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। वहीं, दूसरीं तरफ पीएम की केंद्रीय विशेष सिक्योरिटी व विशेष सुरक्षा समूह (SPG) पहले ही केदारनाथ धाम पहुंच चुकी है। ऐसे में पीएम के प्रोटोकॉल के मुताबिक SPG से सामंजस्य बनाकर उत्तराखंड पुलिस ऋषिकेश से लेकर केदारनाथ धाम तक छावनी के रूप में सुरक्षा घेरा बना रही है। पीएम की सुरक्षा व्यवस्था में 90 फीसदी फोर्स मैदानी इलाकों से रुद्रप्रयाग केदारनाथ पहुंचाई जा रही है।

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बता दें कि पीएम मोदी की केदारनाथ यात्रा से 1 दिन पहले यानी गुरुवार 4 नवंबर को देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट सहित केदारनाथ धाम तक तैनात सैकड़ों सुरक्षा बलों व अधिकारी, कर्मचारियों की इंटेलिजेंस और आईजी LO द्वारा योजनाबद्ध तरीके से ब्रीफिंग की जाएंगी। ताकि, सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कोई कोर कसर न रह सके। वहीं इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब केदारनाथ आएंगे तो उनके साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी, सरकार के मंत्री, सांसद, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और कई संगठन के कई लोग कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। लेकिन इस कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को दूर रखा गया है। दरअसल इस दूरी की वजह कुछ और नहीं, बल्कि 2 दिन पहले उनका केदारनाथ में हुआ विरोध है।

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