उत्तराखंड

सियासत पर सटीक बैठती ‘दैवज्ञ’ की दृष्टि: आचार्य घिल्डियाल की भविष्यवाणियों का फिर दिखा प्रभाव

देहरादून। राजनीति की बिसात पर जहां समीकरण पल-पल बदलते हैं, वहीं कुछ दृष्टियां ऐसी भी होती हैं जो समय से पहले बदलाव की आहट सुन लेती हैं। उत्तराखंड के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” इन दिनों अपनी सटीक भविष्यवाणियों को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।

मार्च के अंतिम दिनों में उन्होंने ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण करते हुए स्पष्ट संकेत दिया था कि अप्रैल से मध्य मई तक का समय राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से असामान्य रहेगा। उस समय इसे सामान्य ज्योतिषीय आकलन माना गया, लेकिन घटनाक्रम ने उनके कथनों को नई विश्वसनीयता प्रदान कर दी है।

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हालिया चुनावी परिदृश्य में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के परिणामों ने स्थापित राजनीतिक धारणाओं को झकझोर दिया है। इन राज्यों में अप्रत्याशित समीकरण उभरने से यह चर्चा तेज हो गई है कि आचार्य ‘दैवज्ञ’ की दूरदर्शिता ने इन बदलावों की पूर्व झलक दे दी थी।

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विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक रूप से वैचारिक राजनीति का मजबूत आधार रहा है, वहां भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती सक्रियता और प्रभाव ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंकाया है।

आचार्य घिल्डियाल इस पूरे घटनाक्रम को ग्रहों के संकेतों की स्वाभाविक परिणति मानते हैं। उनका कहना है कि 11 मई के बाद ग्रहों के गोचर में होने वाले बदलाव राजनीतिक परिदृश्य में और गहरी हलचल पैदा कर सकते हैं। उनके अनुसार मई और जून के महीने सत्ता और प्रशासन के स्तर पर नए समीकरण गढ़ सकते हैं, जबकि देवगुरु बृहस्पति की स्थिति में परिवर्तन दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ सकता है।

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ज्योतिष और राजनीति के इस संगम ने एक बार फिर यह स्थापित किया है कि कुछ दृष्टियां केवल वर्तमान नहीं देखतीं, बल्कि आने वाले समय की दस्तक भी सुन लेती हैं—और आचार्य ‘दैवज्ञ’ की भविष्यवाणियां इसी सूक्ष्म दृष्टि का प्रमाण बनकर उभर रही हैं।

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