उत्तराखंड

अंगदान: मृत्यु के बाद भी जीवन का सबसे बड़ा उपहार, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल का जागरूकता अभियान

देहरादून। अंगदान को मानवता की सर्वोच्च सेवा बताते हुए विशेषज्ञों ने समाज से इस महादान के प्रति आगे आने का आह्वान किया। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से सोमवार को अंगदान दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 100 से अधिक मरीजों, उनके परिजनों तथा किडनी प्रत्यारोपण से जुड़े दाताओं और लाभार्थियों ने सहभागिता कर अंगदान का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के राज्य समन्वयक डॉ. अतुल सिंह एवं श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

यह भी पढ़ें 👉  श्री दरबार साहिब से उठा सेवा का संकल्प, कुमाऊँ तक पहुंचेगी एसजीआरआर की शिक्षा-स्वास्थ्य की अलख

मुख्य अतिथि डॉ. अतुल सिंह ने कहा कि एक व्यक्ति का अंगदान कई गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति अपने अंगों के माध्यम से कई परिवारों की खुशियां लौटा सकता है। समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर प्रत्येक नागरिक को अंगदान के लिए आगे आना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके।

यह भी पढ़ें 👉  श्री दरबार साहिब से उठा सेवा का संकल्प, कुमाऊँ तक पहुंचेगी एसजीआरआर की शिक्षा-स्वास्थ्य की अलख

अस्पताल के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि देश में हजारों मरीज किडनी, लिवर, हृदय और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अंगदाताओं की कमी के कारण समय पर उपचार नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि अंगदान किसी जीवन का अंत नहीं, बल्कि कई जिंदगियों की नई शुरुआत है। यदि प्रत्येक नागरिक अंगदान का संकल्प ले, तो हजारों परिवारों को नई उम्मीद और जीवन मिल सकता है। उन्होंने बताया कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल लगातार अंगदान के प्रति जन-जागरूकता अभियान संचालित कर रहा है।

यह भी पढ़ें 👉  श्री दरबार साहिब से उठा सेवा का संकल्प, कुमाऊँ तक पहुंचेगी एसजीआरआर की शिक्षा-स्वास्थ्य की अलख

कार्यक्रम के दौरान किडनी दाताओं एवं प्रत्यारोपण लाभार्थियों, किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट की इंचार्ज सिस्टर दीक्षा तथा कोऑर्डिनेटर सुषमा कोठियाल को सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने अंगदान से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं, वैज्ञानिक तथ्यों और समाज में प्रचलित भ्रांतियों पर भी विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ. विवेक रोहिला, डॉ. गौरव शेखर शर्मा, डॉ. विवेक विज्जन, डॉ. नुपूर, डॉ. डोरछम सहित चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, मरीज एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।

The Latest

To Top