उत्तराखंड

जब सियासत की धड़कनें तेज़ हुईं, तब ग्रहों की चाल पर टिक गईं निगाहें

 

देशव्यापी छात्र आंदोलनों और राजनीतिक हलचलों पर आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ‘दैवज्ञ’ का ज्योतिषीय विश्लेषण चर्चा में

 

 

देहरादून/हरिद्वार। लोकतंत्र में जब युवा सड़कों पर उतरते हैं तो उनकी आवाज़ केवल नारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह सत्ता के गलियारों में भी दूर तक सुनाई देती है। इन दिनों देश के विभिन्न राज्यों में उभर रहे छात्र आंदोलनों, बढ़ती राजनीतिक तल्खियों और बदलते घटनाक्रमों के बीच उत्तराखंड के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” ने मौजूदा परिस्थितियों पर अपना बहुप्रतीक्षित ज्योतिषीय विश्लेषण जारी किया है। उनका यह बयान सामने आते ही सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

 

आचार्य दैवज्ञ का दावा है कि वर्तमान समय केवल राजनीतिक समीकरणों का परिणाम नहीं, बल्कि ग्रहों की असामान्य स्थिति का भी प्रभाव है। उनके अनुसार वक्री शनि, अतिचारी गुरु तथा मंगल-राहु का प्रभाव देश के सामाजिक और राजनीतिक वातावरण में अस्थिरता, युवाओं के असंतोष तथा प्रशासनिक दबाव की परिस्थितियां निर्मित कर रहा है।

 

उन्होंने कहा कि ज्योतिष में मंगल संघर्ष, ऊर्जा और प्रतिरोध का कारक माना जाता है, जबकि राहु अचानक घटनाओं को व्यापक रूप देने वाला ग्रह है। इन दोनों ग्रहों की सक्रियता के कारण छात्र वर्ग अपनी मांगों को लेकर पहले से अधिक मुखर दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि वर्तमान ग्रह दशा विरोध प्रदर्शनों को तीव्रता देने का संकेत कर रही है।

 

शिक्षा और विद्यार्थियों से जुड़े पंचम भाव का उल्लेख करते हुए आचार्य दैवज्ञ ने कहा कि इस भाव पर पड़ रहे ग्रहों के प्रभाव के कारण युवाओं में भावनात्मक उबाल और व्यवस्था के प्रति असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ा है। उन्होंने इसे सामान्य जागरूकता से आगे बढ़कर परिस्थितिजन्य तीव्र प्रतिक्रिया बताया।

 

आंदोलनों की समयावधि पर उन्होंने कहा कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार मौजूदा उग्र चरण सितंबर के मध्य तक प्रभावी रह सकता है। इसके बाद परिस्थितियों में धीरे-धीरे संतुलन लौटने, संवाद की संभावनाएं बढ़ने और संस्थागत स्तर पर समाधान की दिशा में पहल होने के संकेत मिलते हैं।

 

सत्ता पक्ष को लेकर आचार्य दैवज्ञ का कहना है कि वर्तमान ग्रह स्थिति नेतृत्व के लिए कठिन परीक्षा का समय है। सरकार को नीतिगत फैसलों पर विरोध, प्रशासनिक दबाव और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समय सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि कठिन दौर से गुजरकर नेतृत्व के और अधिक सशक्त होकर उभरने का संकेत देता है।

 

विपक्ष की भूमिका पर उनका आकलन है कि मौजूदा परिस्थितियां उसे सरकार को घेरने का अवसर अवश्य प्रदान कर रही हैं, किंतु ग्रहों के संकेत बताते हैं कि उसे अपनी अपेक्षा के अनुरूप व्यापक राजनीतिक लाभ मिलना आसान नहीं होगा।

 

राजनीतिक घटनाओं पर समय-समय पर अपने ज्योतिषीय विश्लेषणों के कारण चर्चा में रहने वाले आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” का यह ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब छात्र आंदोलन और राजनीतिक विमर्श राष्ट्रीय बहस का केंद्र बने हुए हैं।

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