उत्तराखंड

एआई की शक्ति से बदलेगी चिकित्सा की तस्वीर, एसआरएचयू-वायोनिक्स ने मिलाया विज्ञान और नवाचार का हाथ

देहरादून । चिकित्सा विज्ञान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका के बीच उत्तराखंड को स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू), जौलीग्रांट और वायोनिक्स बायोसाइंसेज के बीच एआई आधारित चिकित्सा अनुसंधान एवं अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एचआईएमएस) में ‘हिमालयन सेंटर ऑफ स्पेक्ट्रल इंटेलिजेंस’ नामक अत्याधुनिक प्रयोगशाला का शुभारंभ भी किया गया, जिसे भविष्य के स्वास्थ्य अनुसंधान की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

यह साझेदारी केवल एक औपचारिक समझौता नहीं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान को तकनीक के साथ जोड़ने की ऐसी पहल है, जो बीमारियों की पहचान को अधिक सटीक, तेज और किफायती बनाने की दिशा में काम करेगी। प्रारंभिक चरण में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) की त्वरित जांच के लिए एआई आधारित तकनीकों पर शोध किया जाएगा। इसके बाद कैंसर, संक्रामक रोग, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा माइक्रोप्लास्टिक की पहचान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक अनुसंधान का दायरा बढ़ाया जाएगा।

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एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने कहा कि विश्वविद्यालय की सोच केवल शोध पत्र प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीकों का विकास करना है जो सीधे समाज और आम नागरिक के जीवन को बेहतर बना सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी ही भविष्य के भारत की वैज्ञानिक प्रगति का आधार बनेगी।

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कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि विश्वविद्यालय पहले से जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर व्यापक शोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि एआई के समावेश से चिकित्सा अनुसंधान की गति और गुणवत्ता दोनों में अभूतपूर्व सुधार आएगा। यह साझेदारी न केवल कैंसर और अन्य जटिल रोगों के निदान को नई दिशा देगी, बल्कि एसआरएचयू को वैश्विक स्तर पर शोध-प्रधान विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी अहम साबित होगी।

वायोनिक्स बायोसाइंसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक वाधवा ने बताया कि दोनों संस्थान संयुक्त रूप से एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स, कैंसर निदान, रोग पहचान, जल गुणवत्ता परीक्षण, पर्यावरणीय निगरानी, माइक्रोप्लास्टिक डिटेक्शन तथा उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों पर अनुसंधान करेंगे। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक और चिकित्सा विज्ञान का यह संगम भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जनसुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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एचआईएमएस के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा, कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल, प्रति कुलपति डॉ. ए.के. देवराड़ी, एचआईएमएस के डीन डॉ. ए. शरीफ, वायोनिक्स बायोसाइंसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक वाधवा सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल समन्वय एचआईएमएस के क्लीनिकल रिसर्च विभागाध्यक्ष डॉ. निक्कू यादव ने किया।

इस पहल के साथ एसआरएचयू ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाला दौर केवल उपचार का नहीं, बल्कि तकनीक और शोध के सहारे बीमारियों की समय रहते पहचान कर स्वस्थ समाज के निर्माण का होगा।

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