उत्तराखंड

इलाज: इन्दिरेश अस्पताल में नई क्रांति – बुजुर्गों के दिमागी थक्कों का बिना चीरा इलाज!

देहरादून। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, देहरादून ने चिकित्सा विज्ञान की दिशा में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार क्रोनिक सबड्यूरल हेमेटोमा (Chronic Subdural Hematoma – cSDH) का इलाज आधुनिकतम तकनीक मिडिल मेनिंजियल आर्टरी एम्बोलाइजेशन (MMAE) द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।

अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. महेश रमोला के नेतृत्व में दो मरीजों पर यह प्रोसीजर किया गया। यह अत्याधुनिक तकनीक पारंपरिक सर्जरी की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, बिना बड़े चीरे के और न्यूनतम जोखिम वाली है। इससे मरीजों की रिकवरी तेजी से होती है तथा बार-बार ऑपरेशन की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाती है।

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क्या है क्रोनिक सबड्यूरल हेमेटोमा?
cSDH एक गंभीर न्यूरोसर्जिकल समस्या है, जिसमें सिर पर हल्की चोट के बाद मस्तिष्क के ऊपर खून जमा हो जाता है। यह स्थिति बुजुर्गों में अधिक पाई जाती है और इसके लक्षणों में सिरदर्द, उल्टी, हाथ-पैर में कमजोरी, भूलने की आदत और कभी-कभी बेहोशी तक शामिल हो सकती है।
पारंपरिक इलाज में खोपड़ी की हड्डी काटकर हेमेटोमा हटाना पड़ता है, लेकिन 30-50% मामलों में खून फिर से जमने और बार-बार ऑपरेशन की नौबत आने का खतरा रहता है।

कैसे मदद करती है MMAE तकनीक?
MMAE एक मिनिमली इनवेसिव (Minimally Invasive) प्रक्रिया है, जिसमें बारीक कैथेटर के माध्यम से मस्तिष्क की मध्य झिल्ली की धमनियों (Middle Meningeal Artery) में विशेष दवा दी जाती है। यह प्रक्रिया बिना बड़े चीरे या टांके के होती है और खून दोबारा जमने की संभावना को काफी कम करती है।
यह तकनीक खासकर बुजुर्ग और उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (NEJM) में प्रकाशित हालिया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन भी MMAE की प्रभावशीलता को प्रमाणित कर चुका है।

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उत्तराखंड को मिली नई सुविधा
अभी तक MMAE की सुविधा केवल देश के कुछ चुनिंदा बड़े चिकित्सा केंद्रों तक सीमित थी। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल अब उन गिने-चुने संस्थानों में शामिल हो गया है जहाँ यह आधुनिकतम सुविधा उपलब्ध है। इससे उत्तराखंड और समीपवर्ती राज्यों के मरीजों को मेट्रो शहरों तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

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टीम का योगदान
इस सफल प्रोसीजर में डॉ. महेश रमोला के साथ डॉ. शिव करण गिल, डॉ. रितिश गर्ग, डॉ. निशित गोविल, डॉ. हरिओम खंडेलवाल, डॉ. दिविज ध्यानी, डॉ. पंकज अरोड़ा (वरिष्ठ न्यूरोसर्जन), डॉ. विभू शंकर (न्यूरोसर्जन) सहित अनुज राणा, भुवन, विपेन, मनीष भट्ट, मुकुल और अंकित का विशेष योगदान रहा।
अस्पताल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।

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