महंत रविंद्र पुरी बोले – गोबर होली हमारी सनातन आस्था और पर्यावरण चेतना का प्रतीक
हरिद्वार | फाल्गुन मास के रंगोत्सव के बीच धर्मनगरी हरिद्वार में संत समाज ने अनोखे अंदाज में होली मनाई। जूना अखाड़ा स्थित माया देवी मंदिर प्रांगण में संतों ने पारंपरिक रंगों के साथ गाय के गोबर से होली खेलकर सनातन परंपरा और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
शुक्रवार को आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जूना अखाड़ा और निरंजनी अखाड़ा के संतों ने एक-दूसरे को रंग और गोबर लगाकर शुभकामनाएं दीं। भजन-कीर्तन और उत्साह के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी इस अनूठी होली के साक्षी बने।
इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि गोबर होली हमारी प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है और उसका गोबर भी पवित्र माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।
वहीं परिषद के महामंत्री स्वामी हरिगिरि महाराज ने कहा कि होली का पर्व संत समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है। गोबर होली के माध्यम से समाज को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।
संत समाज ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे होली को प्रेम, सौहार्द और मर्यादा के साथ मनाएं तथा भारतीय संस्कृति की परंपराओं को आगे बढ़ाएं।


