उत्तराखंड

हिम्स जौलीग्रांट बना स्वास्थ्य शिक्षा का सशक्त केंद्र, विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विज्ञान आधारित आहार जागरूकता की अनूठी पहल

डोईवाला/देहरादून। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स), जौलीग्रांट ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि जागरूकता और जीवनशैली सुधार का व्यापक अभियान भी हैं। डाइटीटिक्स विभाग की पहल पर आयोजित “क्यूलिनरी कार्निवल” और “पोस्टर जंक्शन” कार्यक्रमों ने वैज्ञानिक सोच और संतुलित आहार के महत्व को प्रभावी ढंग से सामने रखा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की इस वर्ष की थीम “स्वास्थ्य के लिए एकजुट, विज्ञान के साथ खड़े रहें” को केंद्र में रखते हुए आयोजित कार्यक्रमों में प्रतिभागियों ने न केवल विविध व्यंजन प्रस्तुत किए, बल्कि उनके पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभ को भी तार्किक व वैज्ञानिक आधार पर समझाया। यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि हिम्स जैसे संस्थान चिकित्सा शिक्षा को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

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“क्यूलिनरी कार्निवल” में पारंपरिक और क्षेत्रीय व्यंजनों के माध्यम से संतुलित आहार की अवधारणा को जीवंत किया गया, वहीं “पोस्टर जंक्शन” के जरिए स्वास्थ्य जागरूकता को रचनात्मक अभिव्यक्ति मिली। प्रतियोगिता में 21 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें नर्सिंग छात्रा महक पुंडीर ने तिब्बती व्यंजन के साथ प्रथम स्थान हासिल किया। महिमा पाल ने नेपाली व्यंजन के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि वंदना कुमारी (जीडीए) ने गढ़वाली व्यंजन के लिए तृतीय स्थान अर्जित किया।
कार्यक्रम का मूल्यांकन डॉ. कंचन, डॉ. कौशिक पी. शर्मा एवं डॉ. स्मिता डिमरी जैसे विशेषज्ञों द्वारा किया गया, जिससे प्रतियोगिता की गुणवत्ता और विश्वसनीयता और अधिक सुदृढ़ हुई।
मुख्य अतिथि निदेशक (अस्पताल सेवाएं) डॉ. हेम चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि हिम्स का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में डाइटीशियन इंचार्ज स्वाति पुरोहित के नेतृत्व में पूरी टीम का सराहनीय योगदान रहा। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि जब चिकित्सा संस्थान शिक्षा, विज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ लेकर चलते हैं, तो स्वास्थ्य केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि एक सामूहिक आंदोलन बन जाता है।

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