शुभ संयोगों की छाया में 19 मार्च से आरंभ होगी चैत्र नवरात्रि, पालकी पर विराजकर आएंगी जगतजननी:आचार्य दैवज्ञ
देहरादून/हरिद्वार/गोपेश्वर। वसंत ऋतु की पावन आहट के साथ शक्ति साधना का महान पर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष विशेष शुभ संयोगों के बीच 19 मार्च से आरंभ होने जा रहा है। उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर प्रारंभ होकर 20 मार्च की प्रातः 04 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। यही कारण है कि इस वर्ष नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च को ही माना जाएगा।
आचार्य दैवज्ञ का कहना है कि इस बार देवी दुर्गा का आगमन पालकी पर हो रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत मंगलकारी संकेत माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिवस घटस्थापना अर्थात कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसके लिए पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 बजे तक रहेगा, जबकि दूसरा मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे के बीच रहेगा। इस अवधि में विधि-विधान से की गई पूजा को अत्यंत फलदायी बताया गया है।
नौ दिवसीय इस पावन पर्व में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाएगी। प्रथम दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी और सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होगी।
26 मार्च को अष्टमी के अवसर पर मां महागौरी की आराधना के साथ कन्या पूजन किया जाएगा, जबकि 27 मार्च को नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ श्रद्धालु कन्याओं का पूजन कर नवरात्रि का समापन करेंगे। शक्ति, श्रद्धा और साधना का यह पर्व पूरे देश में आस्था और भक्ति की विशेष ऊर्जा के साथ मनाया जाएगा।



