उत्तराखंड

राजनीति की गहराइयों पर मंथन: देहरादून में प्रबुद्ध समाज से संवाद करेंगे मोहन भागवत

देहरादून। विचार और शक्ति के बीच का अंतर ही राजनीति की असली कसौटी है — और शायद इसी कसौटी पर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत 22 फरवरी को देहरादून में समाज के उन प्रबुद्ध एवं प्रभावशाली व्यक्तित्वों के साथ विमर्श करेंगे, जो राजनीति को केवल करते ही नहीं, बल्कि उसे समझते भी हैं।

 

यह बैठक सामान्य राजनीतिक संवाद नहीं, बल्कि विचार की उस गहराई तक पहुंचने का प्रयास मानी जा रही है, जहां समाज, सत्ता और भविष्य की दिशा एक साथ विचाराधीन होती है। जानकारी के अनुसार, इस विशेष विचार-मंथन में उत्तराखंड के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य, संस्कृत शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक एवं सामाजिक बौद्धिक विमर्श के प्रमुख हस्ताक्षर डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल दैवज्ञ को भी आमंत्रित किया गया है।

यह भी पढ़ें 👉  देहरादून में सत्ता को सीधी चुनौती — महारैली से गरजे विपक्ष, बदलाव का बिगुल

सूत्रों का कहना है कि संघ नेतृत्व उन्हें केवल एक विद्वान ज्योतिषाचार्य या प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि समाज की मानसिक दिशा को समझने और प्रभावित करने वाले व्यक्तित्व के रूप में देखता है। यही कारण है कि सरसंघचालक उनके साथ अलग से भी विचार-विमर्श कर सकते हैं, जिसमें देश और राज्य की वर्तमान राजनीतिक संरचना, सामाजिक प्रवृत्तियां और भविष्य की संभावनाएं चर्चा के केंद्र में रहेंगी।

यह भी पढ़ें 👉  देहरादून में सत्ता को सीधी चुनौती — महारैली से गरजे विपक्ष, बदलाव का बिगुल

 

गढ़ी कैंट स्थित संस्कृति विभाग के सभागार में आयोजित होने वाली यह बैठक अपने स्वरूप में वैचारिक, सामाजिक और रणनीतिक— तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह केवल संवाद नहीं, बल्कि दृष्टि और दिशा तय करने का प्रयास भी माना जा रहा है।

 

डॉ. घिल्डियाल ने कार्यक्रम की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि उनका दायित्व केवल राष्ट्रहित और लोककल्याण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि वे किसी दल, व्यक्ति या विचारधारा से बंधे नहीं हैं — जो भी मार्गदर्शन चाहता है, उसे वे निष्पक्ष भाव से सलाह देना अपना नैतिक धर्म मानते हैं।

यह भी पढ़ें 👉  देहरादून में सत्ता को सीधी चुनौती — महारैली से गरजे विपक्ष, बदलाव का बिगुल

 

गौरतलब है कि उनके परामर्श के लिए देश-विदेश की अनेक प्रभावशाली हस्तियां गोपनीय रूप से उनसे संपर्क करती रही हैं, जिससे उनका प्रभाव केवल धार्मिक या ज्योतिषीय क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक-मानसिक विमर्श तक विस्तृत माना जाता है।

 

राजनीतिक शोर से दूर, विचार की शांति में होने जा रहा यह संवाद आने वाले समय की वैचारिक दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकता है।

The Latest

To Top