संस्कार और तकनीक का संगम ही गढ़ेगा विकसित भारत : डॉ. घिल्डियाल
देहरादून। बदलते दौर में शिक्षा का अर्थ केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल तकनीक के बिना भविष्य की कल्पना अधूरी है। इसी सोच को साकार करने की दिशा में देहरादून स्थित मातृ सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए कंप्यूटर प्रयोगशाला स्थापित कर एक सराहनीय पहल की है। रविवार को आयोजित समारोह में सहायक निदेशक शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने प्रयोगशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि यदि भारत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुरूप नव्य, भव्य और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है तो इसकी शुरुआत विद्यालयों से ही करनी होगी।
मुख्य अतिथि डॉ. घिल्डियाल ने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा जहां भारतीय संस्कृति और संस्कारों की आधारशिला है, वहीं आधुनिक तकनीकी शिक्षा नए भारत की पहचान बनेगी। दोनों का समन्वय ही देश को ज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में विश्व पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
उन्होंने मातृ सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक कुलदीप जखमोला की सराहना करते हुए कहा कि निर्धन विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर प्रयोगशाला स्थापित करना केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य में किया गया निवेश है। उन्होंने इस पहल में सहयोग देने वाले संजय शर्मा, वीरेंद्र पोखरियाल, डॉ. प्रदीप जोशी तथा श्रीमती सुष्मिता ध्यानी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की वास्तविक ताकत वही लोग हैं, जो अपने संसाधनों का उपयोग दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने में करते हैं। उन्होंने अन्य सामाजिक संस्थाओं और सक्षम नागरिकों से भी शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे प्रयासों से जुड़ने का आह्वान किया।
ट्रस्ट के संस्थापक कुलदीप जखमोला ने कहा कि चार वर्ष पूर्व स्थापित मातृ सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई कंप्यूटर प्रयोगशाला विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी और उनके सपनों को नई उड़ान देगी।
कार्यक्रम में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य संजय शर्मा, देहरादून के पूर्व मेयर प्रत्याशी वीरेंद्र पोखरियाल, डॉ. प्रदीप जोशी तथा पूर्व पार्षद सुमित्रा ध्यानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, शिक्षक, समाजसेवी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।









