उत्तराखंड

डीएम की सख्ती से टूटा कब्जे का किला — 15 साल बाद मिला विस्थापित परिवार को न्याय

देहरादून। जिला प्रशासन की सख्त और निर्णायक कार्रवाई से वर्षों से अतिक्रमित भूमि पर आखिरकार न्याय मिला। जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों और निरंतर निगरानी के चलते 15 वर्षों से लंबित भूमि विवाद का समाधान करते हुए टिहरी बांध परियोजना से विस्थापित पहाड़ी दंपति को उनका आवासीय भूखण्ड विधिवत दिलाया गया।

ग्राम अटक फार्म, परगना पछवादून, तहसील विकासनगर क्षेत्र में पुनर्वास के तहत आवंटित भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत सामने आते ही जिलाधिकारी ने मामले को प्राथमिकता में लिया और तत्काल संयुक्त जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए।

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प्रशासन की सक्रियता का परिणाम रहा कि वर्षों से कब्जाई गई भूमि से अतिक्रमण हटाकर पात्र लाभार्थियों को उनका अधिकार सौंप दिया गया।

यह मामला टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की टिहरी बांध परियोजना के अंतर्गत विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से जुड़ा था। जांच में पाया गया कि आवंटित भूखण्डों पर अवैध रूप से कब्जा कर खेती की जा रही थी। जिलाधिकारी के सख्त निर्देश पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए खसरा संख्या 301, 302 और 303 से अतिक्रमण हटवाया और भूखण्ड संख्या-29 सहित संबंधित भूखण्डों पर विधिसम्मत कब्जा दिलाया।

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कब्जा मिलने के बाद लाभार्थी दंपति ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि वर्षों से लंबित समस्या का समाधान प्रशासन की सक्रिय पहल से संभव हो सका।

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जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि पात्र लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भूमि कब्जाने वाले व भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
प्रशासन की इस निर्णायक कार्रवाई को देहरादून जिले में न्यायपूर्ण शासन और प्रभावी प्रशासन का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।

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