ऋषिकेश में रजिस्ट्रियों का बड़ा खेल बेनकाब — डीएम की रेड पड़ी भारी, उप निबंधक निलंबित, करोड़ों की स्टाम्प चोरी उजागर!
देहरादून। जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने रजिस्ट्रार कार्यालयों में चल रहे खेल पर बड़ा शिकंजा कस दिया है। डीएम सविन बसंल के औचक निरीक्षण के बाद शासन ने उप निबंधक हरीश कुमार को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। उनके खिलाफ विधिवत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
औचक निरीक्षण में खुला ‘रजिस्ट्रेशन रैकेट’
डीएम की अचानक हुई जांच में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। उप निबंधक की गैरमौजूदगी में लिपिक और फर्जी कर्मचारियों से रजिस्ट्रियां कराई जा रही थीं। कई दस्तावेज महीनों नहीं बल्कि वर्षों तक कार्यालय में दबाकर रखे गए।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि संपत्ति का मूल्यांकन किए बिना स्टाम्प शुल्क पास किया जा रहा था, जबकि जिम्मेदार कर्मचारी नियमों पर सवाल होने पर जवाब तक नहीं दे पाए।
औद्योगिक जमीन को आवासीय बताकर करोड़ों की स्टाम्प चोरी
सबसे बड़ा खुलासा जमीन रजिस्ट्रियों में हेरफेर का हुआ। औद्योगिक भूमि को आवासीय बताकर छोटे-छोटे भूखंडों में दर्जनों रजिस्ट्रियां कराई गईं। इससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ और खरीदारों के साथ भी धोखाधड़ी की आशंका जताई गई।
अलमारियों में धूल खाते रहे लोगों के मूल दस्तावेज
आम लोगों की परेशानी भी जांच में सामने आई। जिन मूल अभिलेखों को तीन दिन में लौटाना था, वे महीनों से अलमारियों में बंद मिले। अर्जेंट नकल, जो 24 घंटे में मिलनी चाहिए, वह भी लंबे समय से लंबित थी। मौके पर मौजूद फरियादियों ने खुलकर अपनी आपबीती सुनाई।
घोस्ट कर्मचारी भी पकड़ा गया
कार्यालय में एक ऐसा व्यक्ति भी मिला जो बिना नियुक्ति पत्र और बिना रिकॉर्ड के रजिस्ट्रेशन कार्य कर रहा था। यानी सरकारी दफ्तर में ‘घोस्ट कर्मचारी’ खुलकर काम कर रहा था।
जीरो टॉलरेंस का सख्त संदेश
जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर शासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए निलंबन का आदेश जारी किया। प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि राजस्व से खिलवाड़, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अब सख्त कार्रवाई होगी और अन्य रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।


