उत्तराखंड

टिहरी पुनर्वास घोटाला: जांच के बाद चार नामजद, एफआईआर दर्ज

टिहरी। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकार ने एक बार फिर सख़्त रुख़ दिखाया है। टिहरी गढ़वाल जनपद में पुनर्वास भूखण्ड आवंटन में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों के विरुद्ध गुरुवार को एफआईआर दर्ज कराई गई है।

मुख्यमंत्री धामी के निर्देशानुसार प्रदेशभर में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। इसी क्रम में टिहरी गढ़वाल में जिलाधिकारी एवं पुनर्वास निदेशक नितिका खण्डेलवाल के निर्देशन में पुनर्वास आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा के दौरान एक गंभीर प्रकरण उजागर हुआ।

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जांच में सामने आया कि पुनर्वास स्थल निर्मल (ब्लॉक ए व बी) एवं आमबाग में कुछ व्यक्तियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर भूखण्डों का कथित रूप से गलत आवंटन किया गया। शिकायत प्राप्त होते ही प्रशासन ने मामले को दबाने के बजाय निष्पक्ष जांच का रास्ता अपनाया।

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जिलाधिकारी द्वारा गठित अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार की अध्यक्षता वाली जांच समिति की संस्तुति के आधार पर कोतवाली नई टिहरी में एफआईआर दर्ज कराई गई। नामजद आरोपियों में सुरेश सिंह, नरेश सिंह, खेम सिंह (पुत्र महाबीर सिंह), सुशीला देवी सहित अन्य अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।

मुख्यमंत्री धामी की मंशा के अनुरूप पुनर्वास विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग को पूर्ण सहयोग प्रदान किया है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित की योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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जिलाधिकारी टिहरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि दोषियों के विरुद्ध कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र लागू किया जा रहा है।

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