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जीवन रक्षक:मौत की पटकथा गंगा में लिखी जा रही थी, ऋषिकेश पुलिस ने मौके पर स्क्रिप्ट बदल दी,वीडियो

ऋषिकेश। त्रिवेणी घाट पर गंगा की उफनती धारा उस वक्त काल बन चुकी थी, जब स्नान कर रहा एक युवक तेज बहाव में बहते-बहते डूबने लगा। घाट पर मौजूद लोग बेबस थे, चीख-पुकार गूंज रही थी और हर सेकेंड मौत को करीब ला रही थी। ऐसे में अगर कोई उम्मीद बची थी, तो वह खाकी की वर्दी थी—और वर्दी ने निराश नहीं किया।

 

ऋषिकेश पुलिस, जल पुलिस और आपदा राहत दल के जवानों ने बिना एक पल गंवाए गंगा के प्रचंड प्रवाह में छलांग लगा दी। न बहाव की परवाह, न अपनी जान की चिंता—बस एक संकल्प था, जिंदगी बचानी है। कड़ी मशक्कत और अद्भुत तालमेल के बाद युवक को 72 सीढ़ी के समीप गंगा की पकड़ से बाहर खींच लिया गया।

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तेज बहाव में दूर तक बह जाने के कारण युवक की सांसें थमने के कगार पर थीं। पर यही वह क्षण था जब वर्दी सिर्फ कानून नहीं, जीवन रक्षक बन गई। बचाव दल ने असाधारण धैर्य और दक्षता का परिचय देते हुए मौके पर ही सीपीआर शुरू की। एम्बुलेंस के पहुंचने तक जवान जीवन की डोर थामे रहे और आखिरकार युवक को होश में लाकर एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया।

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यह कोई साधारण रेस्क्यू नहीं था। यह उस वर्दी का परिचय था, जो संकट की घड़ी में ढाल बनकर खड़ी होती है, जो सिर्फ आदेश नहीं मानती, बल्कि मानवता निभाती है। त्रिवेणी घाट पर उस सुबह गंगा की लहरों से नहीं, बल्कि खाकी के हौसले से इतिहास लिखा गया।

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बचाव अभियान में आपदा राहत दल 40 बटालियन हरिद्वार के आरक्षी हरीश कुमार, संतराम, अनिल कुमार, जल पुलिस के गोताखोर विनोद सेमवाल और त्रिवेणी घाट चौकी के आरक्षी भुवन चन्द्र की भूमिका सराहनीय रही। इन जांबाज़ों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ पहचान नहीं, भरोसा है।

 

 

 

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