आरोप:AIIMS ऋषिकेश में मानवता शर्मसार: ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर पर गंभीर मरीज से अभद्रता और लापरवाही का आरोप
ऋषिकेश। देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार AIIMS ऋषिकेश एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। इस बार मामला ट्रॉमा सेंटर से जुड़ा है, जहाँ सड़क दुर्घटना में घायल एक बुज़ुर्ग महिला को कथित तौर पर न तो संवेदनशील इलाज मिला और न ही मानवीय व्यवहार। पीड़ित के परिजन ने ट्रॉमा सेंटर में तैनात डॉक्टर कादिर खान पर अभद्र भाषा, कर्तव्य-लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित के पुत्र पंकज जुगलान के अनुसार, 30 जनवरी की रात सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल उनकी माता को तत्काल AIIMS ऋषिकेश के ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। आरोप है कि मरीज की हालत नाज़ुक होने के बावजूद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने न तो समुचित चिकित्सकीय जांच की और न ही उपचार की कोई स्पष्ट जानकारी दी। इससे भी अधिक चिंताजनक यह कि डॉक्टर द्वारा कथित रूप से अपमानजनक और असंवेदनशील भाषा का प्रयोग किया गया।
परिजनों का कहना है कि बार-बार आग्रह और सम्मानपूर्वक संवाद के बावजूद डॉक्टर का रवैया सहयोगात्मक नहीं रहा। परिणामस्वरूप, इलाज न मिलने की स्थिति में परिवार को रात करीब 1:30 बजे घायल महिला को बिना उपचार के वापस घर ले जाना पड़ा। सवाल यह है कि क्या AIIMS जैसे संस्थान में गंभीर मरीजों के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार्य है?

यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि AIIMS जैसी राष्ट्रीय संस्था की कार्यसंस्कृति और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। ट्रॉमा सेंटर, जहाँ हर सेकंड जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है, वहाँ संवेदनहीनता और लापरवाही के आरोप बेहद चिंताजनक हैं।
पीड़ित पक्ष ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत AIIMS की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ को सौंपते हुए दोषी डॉक्टर के खिलाफ तत्काल निलंबन, सेवा रिकॉर्ड की जांच और ट्रॉमा सेंटर में सख्त अनुशासनात्मक व्यवस्था लागू करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च स्तर पर शिकायत और जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी होता है। ऐसे में AIIMS प्रशासन की चुप्पी या ढिलाई न केवल संस्थान की साख को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि आम नागरिकों के भरोसे को भी गहरा आघात देगी। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि AIIMS प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कदम उठाता है—जांच, जवाबदेही या केवल औपचारिकता।


