उत्तराखंड

सनातन चेतना के संवाहक हैं संत, समाज को देते हैं नैतिक दिशा : अमित शाह

डॉ पंकज कौशिक /नई दिल्ली। सनातन धर्म की जीवंतता, निरंतरता और सामाजिक उपयोगिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त संदेश उस समय सामने आया, जब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य श्री रविंद्रपुरी महाराज एवं दक्षिण काली मंदिर के प्रधान संत पूज्य श्री कैलाशानंद महाराज ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को सप्रेम ‘शक्ति स्तवन’ नामक आध्यात्मिक ग्रंथ भेंट किया।
इस अवसर पर सनातन धर्म की समकालीन प्रासंगिकता, सांस्कृतिक संरक्षण तथा सामाजिक समरसता को लेकर गंभीर एवं सार्थक विमर्श हुआ। संत समाज और राष्ट्र निर्माण के परस्पर संबंध पर चर्चा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि सनातन चेतना भारतीय समाज की आत्मा है, जो पीढ़ियों से समाज को नैतिक दिशा प्रदान करती आ रही है।
पूज्य श्री रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि ‘शक्ति स्तवन’ ग्रंथ सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को सरल, व्यवहारिक एवं जनोपयोगी रूप में प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ न केवल आध्यात्मिक चेतना का संवाहक है, बल्कि सामान्य जन को सनातन मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र व्यवस्था है, जो समाज में संस्कार, अनुशासन, करुणा एवं सामूहिक सौहार्द को सुदृढ़ करती है।
उन्होंने कहा कि हिंदू परंपराओं की जीवंतता का आधार सनातन चेतना है, जिसके सिद्धांत कालजयी हैं। आधुनिक समय की चुनौतियों के बीच भी ये मूल्य समाज को संतुलन, स्थिरता और दिशा प्रदान कर रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संत समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि
“सनातन धर्म की निरंतरता और प्रभावशीलता का श्रेय संत समाज को जाता है। संत केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शक नहीं, बल्कि समाज के नैतिक प्रहरी हैं, जिन्होंने भारतीय संस्कृति को जीवित रखा है।”
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद सदियों से सनातन परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त केंद्र रही है। कुंभ, अर्धकुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से परिषद ने देश-विदेश में सनातन संस्कृति का प्रभावशाली प्रसार किया है।
अमित शाह ने स्वतंत्रता संग्राम में निरंजनी अखाड़े की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा में संत समाज का योगदान अमूल्य रहा है। उन्होंने कहा कि इस ऋण को चुकाने का मार्ग यही है कि सनातन धर्म को संगठित, सशक्त और नई पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनाया जाए, ताकि इसकी चेतना आने वाले समय में और अधिक व्यापक रूप से फैल सके।

The Latest

To Top