उत्तराखंड

नववर्ष पर डीएम सविन बंसल ने बालिकाओं की शिक्षा से की पूजा, नंदा-सुनंदा बनीं 04 बेटियाँ

देहरादून। नववर्ष के प्रथम दिवस जिला प्रशासन देहरादून द्वारा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़ी जरूरतमंद बालिकाओं के जीवन में शिक्षा की नई किरण प्रज्वलित की गई। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रोजेक्ट नंदा–सुनंदा के अंतर्गत 04 बालिकाओं की बाधित शिक्षा को 1.55 लाख रुपये की धनराशि से पुनर्जीवित किया गया। जिलाधिकारी श्री सविन बंसल द्वारा बालिकाओं को शिक्षा सहायता हेतु चेक प्रदान किए गए।
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि माननीय मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित प्रोजेक्ट नंदा–सुनंदा का यह 11वां संस्करण है। अब तक इस अभिनव पहल के माध्यम से 93 बालिकाओं की शिक्षा को 33.50 लाख रुपये की सहायता से पुनर्जीवित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि नववर्ष की शुरुआत यदि बालिकाओं की शिक्षा रूपी पूजा से हो, तो यह समाज के लिए सबसे सार्थक संदेश है।
जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को जनकल्याणकारी योजनाओं से आच्छादित किया जाए। इसी उद्देश्य से जिला प्रशासन स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवाचारात्मक योजनाओं का संचालन कर रहा है। उन्होंने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि निर्धनता और विषम परिस्थितियां किसी भी मेधावी छात्रा की शिक्षा में बाधक नहीं बनने दी जाएंगी। प्रशासन सदैव उनके साथ खड़ा रहेगा।
उन्होंने बालिकाओं से आह्वान किया कि वे लक्ष्य निर्धारित कर पूरी निष्ठा और परिश्रम के साथ शिक्षा प्राप्त करें तथा भविष्य में सक्षम होकर समाज के अन्य जरूरतमंदों की सहायता करें।
कार्यक्रम के दौरान लाभान्वित बालिकाओं ने अपनी जीवन परिस्थितियों को साझा किया।
बालिका नंदनी राजपूत ने बताया कि वर्ष 2018 में पिता के निधन के बाद माता सिलाई-बुनाई कर परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण 11वीं कक्षा की शिक्षा बाधित हो रही थी, जिसे प्रशासन ने पुनर्जीवित किया।
दिव्या ने बताया कि पिता के दिव्यांग हो जाने से परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर हो गई थी, जिससे उनकी 9वीं कक्षा की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
आकांशी धीमान की 8वीं कक्षा की शिक्षा पारिवारिक आर्थिक संकट के कारण बाधित थी।
नव्या नैनवाल ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद शिक्षा परिवार पर बोझ बन गई थी।
इसके अतिरिक्त दून विश्वविद्यालय की छात्रा जीविका अंथवाल ने बताया कि पिता गंभीर रूप से बीमार होकर आईसीयू में भर्ती हैं, जिससे उनकी उच्च शिक्षा बाधित हो रही थी। जिला प्रशासन की सहायता से उनकी शिक्षा को पुनर्जीवित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में लाभार्थी बालिकाओं ने सरकार, माननीय मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, सीडीपीओ, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां एवं बालिकाओं के अभिभावक उपस्थित रहे।

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